Thursday, March 1, 2012

इंतजार

अबकी फागुन ने
भर दिए हैं रंग
टेसू  के फूलों में
बूढ़े हाथों ने
तोड़े हैं फूल
बनाया है रंग
उन फूलों से 
दूंढ ली है
छोटी सी पोटली
अबीर की
अबकी आएगा बेटा
परदेश से
मनायेगा त्यौहार
गाँव में
बूढ़ी आँखें
कर रही हैं इंतजार
फागुन के आने का 
 

Wednesday, January 11, 2012

नया वर्ष

अपनी झोली में
सपने लेकर
फिर आया है
नया वर्ष
लोग तोल रहे हैं
उन सपनों को
अपने अपने सपने
बाँटने की लगी है होड़
मैं भी खड़ी हूँ
उसी कतार में
मगर आँखों में
उभर आया है विगत
बीते वर्ष के जख्म
टीसने लगे हैं अब
फिर भी मैं
खड़ी हूँ उसी कतार में
कुछ सपने तो आयेंगे
मेरे भी हिस्से
खड़ी हूँ इंतजार में

Sunday, December 4, 2011

झर गये सुमन

  रीते सम्बन्ध सभी
 झर गये सुमन
 शब्दों के ठूँठ पर
 भटक रहा मन 
 खोल दिए हमने 
 अर्थों के द्वार
 शब्दों का चाबुक
 अर्थ तार तार
 छिप गये जँगल में
 भाव के हिरन
 खाली है बाँसुरी
  लहरें निस्पंद
 भटक गयी कजरी
 खो गया सावन 
 पीपल की छाँव में
 सुलग रहा मन
 रीते ..........